Sewing (Azoxystrobin 11%+Tebuconazole18%)

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⚙️ यह कैसे काम करता है? (दोहरी सुरक्षा तकनीक)
इसमें दो अलग-अलग रासायनिक समूहों (Groups) का मिश्रण होता है, जो फफूंद को दो तरफ से घेरकर मारते हैं:
  1. एज़ोक्सीस्ट्रोबिन (11%): यह स्ट्रोबिल्यूरिन (Strobilurin) ग्रुप से है। यह कवक (Fungus) की कोशिकाओं में ऊर्जा पैदा करने की प्रक्रिया (श्वसन तंत्र) को ठप कर देता है, जिससे फफूंद के बीजाणु (Spores) अंकुरित नहीं हो पाते।
  2. टेबुकोनाज़ोल (18.3%): यह ट्रायज़ोल (Triazole) ग्रुप से है। यह फफूंद की बाहरी रक्षात्मक परत यानी कोशिका झिल्ली (Cell Membrane) के बनने की प्रक्रिया को रोक देता है, जिससे बढ़ती हुई फफूंद तुरंत सूख जाती है।
???? मुख्य बीमारियां और लक्षित फसलें
यह एक व्यापक स्पेक्ट्रम (Broad-Spectrum) दवा है, जो मुख्य रूप से इन फसलों और रोगों पर सबसे ज्यादा असरदार है:
फसलनियंत्रित होने वाली प्रमुख फफूंद जनित बीमारियांधान (Rice)शीथ ब्लाइट (Sheath Blight) और ब्लास्ट या झुलसा (Blast) रोग।मिर्च (Chilli)फल सड़न (Fruit Rot), डाई-बैक (Die-back) और चूर्णिल आसिता (Powdery Mildew)।टमाटर व आलूअगेती झुलसा (Early Blight) और पछेती झुलसा (Late Blight)।प्याज (Onion)पर्पल ब्लॉच (Purple Blotch) यानी बैंगनी धब्बा रोग।गेहूं (Wheat)पीला रतवा (Yellow Rust) और भूरा रतवा (Brown Rust)।अंगूर व सेबपाउडरी मिल्ड्यू (सफ़ेद फफूंदी) और स्कैब (Scab) रोग।
???? उपयोग की मात्रा (Dosage) और छिड़काव का तरीका
  • प्रति एकड़ खुराक: 250 से 300 मिलीलीटर दवा प्रति एकड़ पर्याप्त होती है।
  • पानी की मात्रा: इस दवा को हमेशा 150 से 200 लीटर पानी में अच्छी तरह मिलाकर प्रति एकड़ स्प्रे करना चाहिए।
  • प्रति टंकी (स्प्रे पंप) खुराक: 15 लीटर वाले पानी के पंप में लगभग 25 से 30 मिलीलीटर दवा डालनी चाहिए।
  • छिड़काव का सही समय: फसल पर रोग के शुरुआती लक्षण (हल्के धब्बे या सफ़ेद पाउडर) दिखाई देते ही पहला स्प्रे कर दें। यदि मौसम में नमी ज्यादा हो और रोग का प्रकोप गंभीर हो, तो 10 से 12 दिनों के बाद दूसरा स्प्रे दोहराएं।
???? इसके मुख्य फायदे (Premium Benefits)
  • फायटोटोनिक प्रभाव (Phytotonic / Greenery Effect): यह फफूंद को मारने के साथ-साथ पौधों में प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) को तेज करता है। इससे पत्तियां लंबे समय तक हरी-भरी रहती हैं, फूलों का झड़ना कम होता है और दानों/फलों की चमक व वजन बढ़ता है।
  • पत्ती के आर-पार असर (Translaminar Action): छिड़काव के दौरान यदि दवा पत्ती के ऊपरी हिस्से पर गिरती है, तो यह पत्ती के निचले हिस्से तक अपने आप पहुँच जाती है, जिससे नीचे छिपे कवक भी नष्ट हो जाते हैं।
  • बारिश का असर नहीं (Rainfastness): स्प्रे करने के मात्र 2 घंटे के भीतर यह पौधों के तंत्र में पूरी तरह समा जाता है। इसके बाद यदि तेज बारिश भी आ जाए, तो भी इसका असर कम नहीं होता।
⚠️ सावधानियां और अनुकूलता (Compatibility)
  • इसका छिड़काव हमेशा सुबह के समय या दोपहर बाद (शाम को) करें जब धूप तेज न हो।
  • इसे कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश आम कीटनाशकों (Insecticides) और पीजीआर (PGR) के साथ मिलाकर स्प्रे किया जा सकता है। हालांकि, इसे अत्यधिक क्षारीय (Alkaline) रसायनों के साथ मिलाने से बचें।
क्या आप अपनी मिर्च, धान या प्याज की फसल में इसका छिड़काव करने जा रहे हैं? यदि आप इसके साथ किसी विशेष कीटनाशक (जैसे थ्रिप्स या सूंड़ी की दवा) को मिलाने की अनुकूलता जानना चाहते हैं, तो फसल का नाम लिखकर जरूर पूछें।

250 970
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⚙️ यह कैसे काम करता है? (दोहरी सुरक्षा तकनीक)
इसमें दो अलग-अलग रासायनिक समूहों (Groups) का मिश्रण होता है, जो फफूंद को दो तरफ से घेरकर मारते हैं:
  1. एज़ोक्सीस्ट्रोबिन (11%): यह स्ट्रोबिल्यूरिन (Strobilurin) ग्रुप से है। यह कवक (Fungus) की कोशिकाओं में ऊर्जा पैदा करने की प्रक्रिया (श्वसन तंत्र) को ठप कर देता है, जिससे फफूंद के बीजाणु (Spores) अंकुरित नहीं हो पाते।
  2. टेबुकोनाज़ोल (18.3%): यह ट्रायज़ोल (Triazole) ग्रुप से है। यह फफूंद की बाहरी रक्षात्मक परत यानी कोशिका झिल्ली (Cell Membrane) के बनने की प्रक्रिया को रोक देता है, जिससे बढ़ती हुई फफूंद तुरंत सूख जाती है।
???? मुख्य बीमारियां और लक्षित फसलें
यह एक व्यापक स्पेक्ट्रम (Broad-Spectrum) दवा है, जो मुख्य रूप से इन फसलों और रोगों पर सबसे ज्यादा असरदार है:
फसलनियंत्रित होने वाली प्रमुख फफूंद जनित बीमारियांधान (Rice)शीथ ब्लाइट (Sheath Blight) और ब्लास्ट या झुलसा (Blast) रोग।मिर्च (Chilli)फल सड़न (Fruit Rot), डाई-बैक (Die-back) और चूर्णिल आसिता (Powdery Mildew)।टमाटर व आलूअगेती झुलसा (Early Blight) और पछेती झुलसा (Late Blight)।प्याज (Onion)पर्पल ब्लॉच (Purple Blotch) यानी बैंगनी धब्बा रोग।गेहूं (Wheat)पीला रतवा (Yellow Rust) और भूरा रतवा (Brown Rust)।अंगूर व सेबपाउडरी मिल्ड्यू (सफ़ेद फफूंदी) और स्कैब (Scab) रोग।
???? उपयोग की मात्रा (Dosage) और छिड़काव का तरीका
  • प्रति एकड़ खुराक: 250 से 300 मिलीलीटर दवा प्रति एकड़ पर्याप्त होती है।
  • पानी की मात्रा: इस दवा को हमेशा 150 से 200 लीटर पानी में अच्छी तरह मिलाकर प्रति एकड़ स्प्रे करना चाहिए।
  • प्रति टंकी (स्प्रे पंप) खुराक: 15 लीटर वाले पानी के पंप में लगभग 25 से 30 मिलीलीटर दवा डालनी चाहिए।
  • छिड़काव का सही समय: फसल पर रोग के शुरुआती लक्षण (हल्के धब्बे या सफ़ेद पाउडर) दिखाई देते ही पहला स्प्रे कर दें। यदि मौसम में नमी ज्यादा हो और रोग का प्रकोप गंभीर हो, तो 10 से 12 दिनों के बाद दूसरा स्प्रे दोहराएं।
???? इसके मुख्य फायदे (Premium Benefits)
  • फायटोटोनिक प्रभाव (Phytotonic / Greenery Effect): यह फफूंद को मारने के साथ-साथ पौधों में प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) को तेज करता है। इससे पत्तियां लंबे समय तक हरी-भरी रहती हैं, फूलों का झड़ना कम होता है और दानों/फलों की चमक व वजन बढ़ता है।
  • पत्ती के आर-पार असर (Translaminar Action): छिड़काव के दौरान यदि दवा पत्ती के ऊपरी हिस्से पर गिरती है, तो यह पत्ती के निचले हिस्से तक अपने आप पहुँच जाती है, जिससे नीचे छिपे कवक भी नष्ट हो जाते हैं।
  • बारिश का असर नहीं (Rainfastness): स्प्रे करने के मात्र 2 घंटे के भीतर यह पौधों के तंत्र में पूरी तरह समा जाता है। इसके बाद यदि तेज बारिश भी आ जाए, तो भी इसका असर कम नहीं होता।
⚠️ सावधानियां और अनुकूलता (Compatibility)
  • इसका छिड़काव हमेशा सुबह के समय या दोपहर बाद (शाम को) करें जब धूप तेज न हो।
  • इसे कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश आम कीटनाशकों (Insecticides) और पीजीआर (PGR) के साथ मिलाकर स्प्रे किया जा सकता है। हालांकि, इसे अत्यधिक क्षारीय (Alkaline) रसायनों के साथ मिलाने से बचें।
क्या आप अपनी मिर्च, धान या प्याज की फसल में इसका छिड़काव करने जा रहे हैं? यदि आप इसके साथ किसी विशेष कीटनाशक (जैसे थ्रिप्स या सूंड़ी की दवा) को मिलाने की अनुकूलता जानना चाहते हैं, तो फसल का नाम लिखकर जरूर पूछें।