शलजम की कुछ लोकप्रिय उन्नत किस्में (Popular Varieties):
- पूसा कंचन (Pusa Kanchan): यह लाल छिलके और मीठे स्वाद वाली एक बहुत ही लोकप्रिय हाइब्रिड किस्म है।
- पूसा चंद्रिमा (Pusa Chandrima): यह पूरी तरह सफेद, गोल और बड़े आकार की किस्म है, जो बहुत जल्दी तैयार होती है।
- पर्पल टॉप व्हाइट ग्लोब (Purple Top White Globe): यह ऊपरी हिस्से से बैंगनी (Purple) और निचले हिस्से से सफेद रंग की होती है। यह दुनिया भर में सबसे ज्यादा उगाई जाने वाली किस्म है।
- पूसा स्वर्णिमा (Pusa Swarnima): इस किस्म का कंद हल्के पीले रंग का होता है और यह पहाड़ी व मैदानी दोनों क्षेत्रों के लिए उत्तम है।
शलजम उगाने के लिए जरूरी टिप्स:
- बुवाई का सही समय: शलजम उगाने का सबसे उत्तम समय सितंबर से दिसंबर के बीच (सर्दियों का मौसम) माना जाता है।
- मिट्टी की तैयारी: इसके अच्छे विकास के लिए भुरभुरी, उपजाऊ दोमट मिट्टी (Loam soil) सबसे अच्छी होती है। जल निकासी (Water drainage) का अच्छा होना जरूरी है।
- फसल की अवधि: शलजम बहुत तेजी से तैयार होती है। बुवाई के मात्र 45 से 60 दिनों के भीतर इसकी फसल तैयार हो जाती है। जब कंद छोटे और मुलायम हों, तभी इन्हें उखाड़ लेना चाहिए, क्योंकि ज्यादा बड़े होने पर ये कड़े और रेशेदार (Spongy) हो जाते हैं।
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शलजम की कुछ लोकप्रिय उन्नत किस्में (Popular Varieties):
- पूसा कंचन (Pusa Kanchan): यह लाल छिलके और मीठे स्वाद वाली एक बहुत ही लोकप्रिय हाइब्रिड किस्म है।
- पूसा चंद्रिमा (Pusa Chandrima): यह पूरी तरह सफेद, गोल और बड़े आकार की किस्म है, जो बहुत जल्दी तैयार होती है।
- पर्पल टॉप व्हाइट ग्लोब (Purple Top White Globe): यह ऊपरी हिस्से से बैंगनी (Purple) और निचले हिस्से से सफेद रंग की होती है। यह दुनिया भर में सबसे ज्यादा उगाई जाने वाली किस्म है।
- पूसा स्वर्णिमा (Pusa Swarnima): इस किस्म का कंद हल्के पीले रंग का होता है और यह पहाड़ी व मैदानी दोनों क्षेत्रों के लिए उत्तम है।
शलजम उगाने के लिए जरूरी टिप्स:
- बुवाई का सही समय: शलजम उगाने का सबसे उत्तम समय सितंबर से दिसंबर के बीच (सर्दियों का मौसम) माना जाता है।
- मिट्टी की तैयारी: इसके अच्छे विकास के लिए भुरभुरी, उपजाऊ दोमट मिट्टी (Loam soil) सबसे अच्छी होती है। जल निकासी (Water drainage) का अच्छा होना जरूरी है।
- फसल की अवधि: शलजम बहुत तेजी से तैयार होती है। बुवाई के मात्र 45 से 60 दिनों के भीतर इसकी फसल तैयार हो जाती है। जब कंद छोटे और मुलायम हों, तभी इन्हें उखाड़ लेना चाहिए, क्योंकि ज्यादा बड़े होने पर ये कड़े और रेशेदार (Spongy) हो जाते हैं।





