स्वाती- 303 विशाल चना

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स्वाती-303 विशाल चने की मुख्य विशेषताएँ:
  • मोटा और वजनदार दाना: इस किस्म के चने का आकार सामान्य चने से बड़ा (Bold) और आकर्षक होता है, जिससे बाजार में इसका भाव (Market Price) बहुत अच्छा मिलता है।
  • अधिक फुटाव और फलियाँ: इसके पौधों में शाखाओं का फुटाव (Branching) बहुत अधिक होता है, जिसके कारण एक ही पौधे पर भारी संख्या में फलियाँ लगती हैं। [1]
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता (Disease Tolerance): चने की फसल में लगने वाली सबसे खतरनाक बीमारी उकठा रोग (Wilt/सूखा रोग) के प्रति यह वैरायटी काफी प्रतिरोधी मानी जाती है।
  • मौसम के प्रति अनुकूल: यह किस्म तापमान के उतार-चढ़ाव को सहन कर सकती है। फूल और फल आते समय अचानक मौसम बदलने पर भी इसके फूल झड़ने की समस्या बहुत कम देखी गई है।
  • उपयोग: इसके मोटे और चमकदार दानों के कारण इसे मुख्य रूप से बेहतरीन क्वालिटी की चना दाल और छोला चना बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। [1]
बुवाई और खेती से जुड़ी मुख्य बातें:
  • बुवाई का सही समय: रबी के मौसम में अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर नवंबर के मध्य तक इसकी बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है।
  • बीज की मात्रा (Seed Rate): दानों का आकार बड़ा होने के कारण एक एकड़ खेत के लिए लगभग 30 से 35 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।
  • सिंचाई: इसे मिट्टी और क्षेत्र के हिसाब से 2 से 3 हल्की सिंचाई की आवश्यकता होती है। पहली सिंचाई फूल आने से पहले (बुवाई के 30-35 दिन बाद) और दूसरी सिंचाई फलियों में दाना बनते समय करनी चाहिए।

1000 1500
Type

स्वाती-303 विशाल चने की मुख्य विशेषताएँ:
  • मोटा और वजनदार दाना: इस किस्म के चने का आकार सामान्य चने से बड़ा (Bold) और आकर्षक होता है, जिससे बाजार में इसका भाव (Market Price) बहुत अच्छा मिलता है।
  • अधिक फुटाव और फलियाँ: इसके पौधों में शाखाओं का फुटाव (Branching) बहुत अधिक होता है, जिसके कारण एक ही पौधे पर भारी संख्या में फलियाँ लगती हैं। [1]
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता (Disease Tolerance): चने की फसल में लगने वाली सबसे खतरनाक बीमारी उकठा रोग (Wilt/सूखा रोग) के प्रति यह वैरायटी काफी प्रतिरोधी मानी जाती है।
  • मौसम के प्रति अनुकूल: यह किस्म तापमान के उतार-चढ़ाव को सहन कर सकती है। फूल और फल आते समय अचानक मौसम बदलने पर भी इसके फूल झड़ने की समस्या बहुत कम देखी गई है।
  • उपयोग: इसके मोटे और चमकदार दानों के कारण इसे मुख्य रूप से बेहतरीन क्वालिटी की चना दाल और छोला चना बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। [1]
बुवाई और खेती से जुड़ी मुख्य बातें:
  • बुवाई का सही समय: रबी के मौसम में अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर नवंबर के मध्य तक इसकी बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है।
  • बीज की मात्रा (Seed Rate): दानों का आकार बड़ा होने के कारण एक एकड़ खेत के लिए लगभग 30 से 35 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।
  • सिंचाई: इसे मिट्टी और क्षेत्र के हिसाब से 2 से 3 हल्की सिंचाई की आवश्यकता होती है। पहली सिंचाई फूल आने से पहले (बुवाई के 30-35 दिन बाद) और दूसरी सिंचाई फलियों में दाना बनते समय करनी चाहिए।