- एंटी-स्पोरुलेंट और कोशिका भित्ति पर प्रहार: यह फंगस की कोशिकाओं में जाकर उनकी कोशिका भित्ति (Cell Wall) के निर्माण को ब्लॉक कर देता है. इससे फंगस के नए बीजाणु (Spores) नहीं बन पाते और रोग का फैलना तुरंत रुक जाता है. [1, 2]
- ट्रांसलैमिनर एक्शन (Translaminar Action): छिड़काव के बाद यह पत्तियों के आर-पार गहराई तक समा जाता है, जिससे पत्ती के ऊपरी और निचले दोनों हिस्सों को पूरी सुरक्षा मिलती है. [1]
- वर्षा सुरक्षा (Rain Fastness): इसमें पत्तियों से चिपकने और अवशोषित होने का बेहतरीन गुण है, जिससे बारिश के मौसम में भी इसका असर आसानी से कम नहीं होता है. [1]
???? नियंत्रित होने वाले मुख्य रोग (Target Diseases)
यह फफूंदनाशक मुख्य रूप से निम्नलिखित जिद्दी रोगों पर प्रभावी है:
- डाउनो मिल्ड्यू (Downy Mildew / मृदुरोमिल आसिता)
- लेट ब्लाइट (Late Blight / पछेती झुलसा) – विशेषकर आलू और टमाटर में.
- फाइटोफ्थोरा रोट (Phytophthora infestans) और मक्का/बेल वाली फसलों के अन्य फंगल रोग. [1, 2, 3]
???? मुख्य फसलें (Target Crops)
इसका सबसे बेहतरीन परिणाम अंगूर (Grapes), आलू (Potato), टमाटर (Tomato), मिर्च (Chilli), शिमला मिर्च (Capsicum) और खीरा/कद्दू वर्गीय फसलों (Cucurbits) में देखा जाता है. [1, 2]
⚖️ सही खुराक और उपयोग की विधि (Dosage)
यह पाउडर रूप (Wettable Powder) में आता है जिसे पानी में घोलकर फोलियर स्प्रे (छिड़काव) किया जाता है: [1, 2]
- प्रति एकड़ खुराक: 200 से 300 ग्राम (अधिकतम 400 ग्राम गंभीर स्थिति में) दवा को 150-200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ स्प्रे करें. [1]
- प्रति स्प्रे पंप (15 लीटर): 15 लीटर वाले सामान्य पंप के लिए 15 से 20 ग्राम दवा पर्याप्त होती है (लगभग 1 से 1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी). [1]
- विशेष सलाह: पछेती झुलसा (Late Blight) के शत-प्रतिशत नियंत्रण के लिए इसे किसी कांटेक्ट फफूंदनाशक (जैसे मैंकोज़ेब) के साथ मिलाकर स्प्रे करने की सलाह दी जाती है. [1]
यदि आप इसका उपयोग करने जा रहे हैं, तो कृपया बताएं:
- आप इसे किस फसल (जैसे आलू, अंगूर या टमाटर) पर डालना चाहते हैं?
- क्या आपकी फसल में रोग की शुरुआत हो चुकी है या आप बचाव (Preventive) के रूप में डाल रहे हैं?
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- एंटी-स्पोरुलेंट और कोशिका भित्ति पर प्रहार: यह फंगस की कोशिकाओं में जाकर उनकी कोशिका भित्ति (Cell Wall) के निर्माण को ब्लॉक कर देता है. इससे फंगस के नए बीजाणु (Spores) नहीं बन पाते और रोग का फैलना तुरंत रुक जाता है. [1, 2]
- ट्रांसलैमिनर एक्शन (Translaminar Action): छिड़काव के बाद यह पत्तियों के आर-पार गहराई तक समा जाता है, जिससे पत्ती के ऊपरी और निचले दोनों हिस्सों को पूरी सुरक्षा मिलती है. [1]
- वर्षा सुरक्षा (Rain Fastness): इसमें पत्तियों से चिपकने और अवशोषित होने का बेहतरीन गुण है, जिससे बारिश के मौसम में भी इसका असर आसानी से कम नहीं होता है. [1]
???? नियंत्रित होने वाले मुख्य रोग (Target Diseases)
यह फफूंदनाशक मुख्य रूप से निम्नलिखित जिद्दी रोगों पर प्रभावी है:
- डाउनो मिल्ड्यू (Downy Mildew / मृदुरोमिल आसिता)
- लेट ब्लाइट (Late Blight / पछेती झुलसा) – विशेषकर आलू और टमाटर में.
- फाइटोफ्थोरा रोट (Phytophthora infestans) और मक्का/बेल वाली फसलों के अन्य फंगल रोग. [1, 2, 3]
???? मुख्य फसलें (Target Crops)
इसका सबसे बेहतरीन परिणाम अंगूर (Grapes), आलू (Potato), टमाटर (Tomato), मिर्च (Chilli), शिमला मिर्च (Capsicum) और खीरा/कद्दू वर्गीय फसलों (Cucurbits) में देखा जाता है. [1, 2]
⚖️ सही खुराक और उपयोग की विधि (Dosage)
यह पाउडर रूप (Wettable Powder) में आता है जिसे पानी में घोलकर फोलियर स्प्रे (छिड़काव) किया जाता है: [1, 2]
- प्रति एकड़ खुराक: 200 से 300 ग्राम (अधिकतम 400 ग्राम गंभीर स्थिति में) दवा को 150-200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ स्प्रे करें. [1]
- प्रति स्प्रे पंप (15 लीटर): 15 लीटर वाले सामान्य पंप के लिए 15 से 20 ग्राम दवा पर्याप्त होती है (लगभग 1 से 1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी). [1]
- विशेष सलाह: पछेती झुलसा (Late Blight) के शत-प्रतिशत नियंत्रण के लिए इसे किसी कांटेक्ट फफूंदनाशक (जैसे मैंकोज़ेब) के साथ मिलाकर स्प्रे करने की सलाह दी जाती है. [1]
यदि आप इसका उपयोग करने जा रहे हैं, तो कृपया बताएं:
- आप इसे किस फसल (जैसे आलू, अंगूर या टमाटर) पर डालना चाहते हैं?
- क्या आपकी फसल में रोग की शुरुआत हो चुकी है या आप बचाव (Preventive) के रूप में डाल रहे हैं?


