- प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) में वृद्धि: यह पौधों में क्लोरोफिल की मात्रा को बढ़ाता है, जिससे पत्तियां हरी रहती हैं और पौधे अपना भोजन अधिक मात्रा में बना पाते हैं. [1, 2]
- पोषक तत्वों का बेहतर अवशोषण: यह पौधों की जड़ों का तेजी से विकास करता है, जिससे मिट्टी से पानी और जरूरी पोषक तत्व खींचने की क्षमता बढ़ जाती है. [1, 2]
- फूल और फल झड़ने से रोकना: यह फसलों में हार्मोनल असंतुलन को ठीक कर फूलों और फलों को समय से पहले गिरने से रोकता है. [1, 2]
- पैदावार में बढ़ोतरी: इसके इस्तेमाल से फसलों में कल्ले (tillers) और शाखाएं अधिक निकलती हैं, जिससे अंततः पैदावार और फल-अनाज की गुणवत्ता में सुधार होता है. [1, 2, 3]
- तनाव सहनशीलता: यह फसलों को सूखे या मौसम के बदलाव जैसे विपरीत हालातों से लड़ने की ताकत देता है. [1]
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- प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) में वृद्धि: यह पौधों में क्लोरोफिल की मात्रा को बढ़ाता है, जिससे पत्तियां हरी रहती हैं और पौधे अपना भोजन अधिक मात्रा में बना पाते हैं. [1, 2]
- पोषक तत्वों का बेहतर अवशोषण: यह पौधों की जड़ों का तेजी से विकास करता है, जिससे मिट्टी से पानी और जरूरी पोषक तत्व खींचने की क्षमता बढ़ जाती है. [1, 2]
- फूल और फल झड़ने से रोकना: यह फसलों में हार्मोनल असंतुलन को ठीक कर फूलों और फलों को समय से पहले गिरने से रोकता है. [1, 2]
- पैदावार में बढ़ोतरी: इसके इस्तेमाल से फसलों में कल्ले (tillers) और शाखाएं अधिक निकलती हैं, जिससे अंततः पैदावार और फल-अनाज की गुणवत्ता में सुधार होता है. [1, 2, 3]
- तनाव सहनशीलता: यह फसलों को सूखे या मौसम के बदलाव जैसे विपरीत हालातों से लड़ने की ताकत देता है. [1]




