. यह कैसे काम करता है? (Mode of Action)
- अंतर्प्रवाही व संपर्क क्रिया (Systemic & Contact Action): यह दवा दोतरफा असर करती है। छिड़काव के बाद यह पौधे के भीतर समा जाती है (Systemic), जिससे जब भी कोई कीट पौधे का रस चूसता है, तो वह मर जाता है। इसके अलावा, जो कीट सीधे दवा के संपर्क में आते हैं, वे भी तुरंत खत्म हो जाते हैं। [1, 2]
- तंत्रिका तंत्र पर हमला: डाइमेथोएट कीटों के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) में रुकावट पैदा करता है, जिससे कीटों को लकवा (Paralysis) मार जाता है और वे तुरंत खाना बंद कर देते हैं, जिससे उनकी मृत्यु हो जाती है। [1, 2]
- माइट्स पर नियंत्रण (Miticidal Activity): यह कीड़ों को मारने के साथ-साथ फसलों में लगने वाली मकड़ी (Mites) को भी प्रभावी ढंग से नियंत्रित करता है। [1, 2]
2. किन कीटों पर काम करता है? (Target Pests)
टैफगोर मुख्य रूप से निम्नलिखित हानिकारक कीटों पर सबसे बढ़िया काम करता है:
- चूसने वाले कीट: थ्रिप्स (Thrips), एफिड्स (Aphids/चेपा), जेसिड्स (Jassids), सफेद मक्खी (Whitefly), मिलीबग (Mealybug) और लीफ हॉपर। [1, 2]
- बोरर और अन्य कीट: तना छेदक (Stem Borer), शूट फ्लाई (Shoot Fly), लीफ माइनर (Leaf Miner) और फल छेदक की शुरुआती अवस्था। [1, 2]
3. प्रमुख फसलें (Target Crops)
इसका उपयोग मुख्य रूप से कपास, धान, मक्का, सरसों, प्याज, आलू, बैंगन, टमाटर, मिर्च, आम और गुलाब जैसी बागवानी व नकदी फसलों में किया जाता है। [1, 2, 3]
4. उपयोग की सही मात्रा और तरीका (Dosage)
- छिड़काव (Spray): 2 मिलीलीटर टैफगोर प्रति लीटर पानी में मिलाकर पौधों पर अच्छी तरह छिड़काव करें।
- प्रति एकड़ मात्रा: सामान्य तौर पर 300 से 400 मिलीलीटर टैफगोर को 150-200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ स्प्रे किया जाता है। [1, 2, 3]
5. सावधानियां
- विषाक्तता: यह दवा तेज गंध वाली होती है और इंसानों व पालतू जानवरों के लिए मध्यम रूप से विषैली है। छिड़काव करते समय मुंह और नाक को ढककर रखें।
- मधुमक्खियों के लिए हानिकारक: जब फसल में फूल आ रहे हों, तब इसका छिड़काव करने से बचें, क्योंकि यह परागण करने वाली मधुमक्खियों के लिए नुकसानदेह हो सकती है।
- इसे किसी भी अन्य फंगसनाशक या कीटनाशक के साथ आसानी से मिलाकर स्प्रे किया जा सकता है। [1, 2]
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. यह कैसे काम करता है? (Mode of Action)
- अंतर्प्रवाही व संपर्क क्रिया (Systemic & Contact Action): यह दवा दोतरफा असर करती है। छिड़काव के बाद यह पौधे के भीतर समा जाती है (Systemic), जिससे जब भी कोई कीट पौधे का रस चूसता है, तो वह मर जाता है। इसके अलावा, जो कीट सीधे दवा के संपर्क में आते हैं, वे भी तुरंत खत्म हो जाते हैं। [1, 2]
- तंत्रिका तंत्र पर हमला: डाइमेथोएट कीटों के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) में रुकावट पैदा करता है, जिससे कीटों को लकवा (Paralysis) मार जाता है और वे तुरंत खाना बंद कर देते हैं, जिससे उनकी मृत्यु हो जाती है। [1, 2]
- माइट्स पर नियंत्रण (Miticidal Activity): यह कीड़ों को मारने के साथ-साथ फसलों में लगने वाली मकड़ी (Mites) को भी प्रभावी ढंग से नियंत्रित करता है। [1, 2]
2. किन कीटों पर काम करता है? (Target Pests)
टैफगोर मुख्य रूप से निम्नलिखित हानिकारक कीटों पर सबसे बढ़िया काम करता है:
- चूसने वाले कीट: थ्रिप्स (Thrips), एफिड्स (Aphids/चेपा), जेसिड्स (Jassids), सफेद मक्खी (Whitefly), मिलीबग (Mealybug) और लीफ हॉपर। [1, 2]
- बोरर और अन्य कीट: तना छेदक (Stem Borer), शूट फ्लाई (Shoot Fly), लीफ माइनर (Leaf Miner) और फल छेदक की शुरुआती अवस्था। [1, 2]
3. प्रमुख फसलें (Target Crops)
इसका उपयोग मुख्य रूप से कपास, धान, मक्का, सरसों, प्याज, आलू, बैंगन, टमाटर, मिर्च, आम और गुलाब जैसी बागवानी व नकदी फसलों में किया जाता है। [1, 2, 3]
4. उपयोग की सही मात्रा और तरीका (Dosage)
- छिड़काव (Spray): 2 मिलीलीटर टैफगोर प्रति लीटर पानी में मिलाकर पौधों पर अच्छी तरह छिड़काव करें।
- प्रति एकड़ मात्रा: सामान्य तौर पर 300 से 400 मिलीलीटर टैफगोर को 150-200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ स्प्रे किया जाता है। [1, 2, 3]
5. सावधानियां
- विषाक्तता: यह दवा तेज गंध वाली होती है और इंसानों व पालतू जानवरों के लिए मध्यम रूप से विषैली है। छिड़काव करते समय मुंह और नाक को ढककर रखें।
- मधुमक्खियों के लिए हानिकारक: जब फसल में फूल आ रहे हों, तब इसका छिड़काव करने से बचें, क्योंकि यह परागण करने वाली मधुमक्खियों के लिए नुकसानदेह हो सकती है।
- इसे किसी भी अन्य फंगसनाशक या कीटनाशक के साथ आसानी से मिलाकर स्प्रे किया जा सकता है। [1, 2]




